December 8, 2022

HACKED BY AYYILDIZ TIM

HACKED BY AYYILDIZ TIM Yıldırım Orduları Birim Komutanlığı

नए चेहरे की जरूरत?

पार्टी के भीतर से और जनता के बीच से भी यही मांग उठ रही है कि कांग्रेस को अब नए खाद की जरूरत है. 2014 के बाद लगातार कांग्रेस का जनाधार कमजोर होता चला गया है, फिर भी कांग्रेस अभी तक जागती हुई नहीं दिखाई दे रही है. 2014 के बाद मात्र पांच छह राज्यों को छोड़कर उसने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है. जो कांग्रेस इस देश में 45 साल से अधिक सरकार चला चुकी है आज वही कांग्रेस स्वयं के अस्तित्व के लिए तरस रही है.

नरेंद्र मोदी की आक्रामक राजनीति के सामने राहुल गांधी की शाकाहारी राजनीति काम नहीं आ रही है, या फिर ऐसा कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी राजनीति के बादशाह है और राहुल गांधी का हुकुम का इक्का हर बार खोटा सिक्का साबित हो रहा है. वह भी तब जब मोदी की राजनीति पुरानी चोट उभारने या गड़े मुर्दे उखाड़ कर गुमराह करने वाली और थोथी राष्ट्वादी है.

जैसा कि सभी जानते हैं जब हिटलर अपना चुनावी प्रचार करता था तब वह पूरे जोर के साथ कहता था देश को बचाने के लिए, मजबूत करने के लिए मुझे वोट दो मैं राष्ट्रवादी हूं राष्ट्रवाद को वोट दो. ऐसा करते करते वह पूरे अपने देश में प्रसिद्ध चेहरा बन गया था लोग उसके चेहरे को भगवान की तरह पूजते थे. हमारे देश के हकीम का चेहरा भी ईश्वर रूपी हो गया है.

इस देश के ही नहीं बल्कि विश्व के प्रमुख नेताओं में से एक नेहरू को जब बदनाम करने की साजिश रची गई तो उसे भी कांग्रेस रोकने में नाकाम नजर आई और भाजपा की आक्रामक राजनीति तथा चरम शैली सफल हो गई.

आज भाजपा हर राज्य में अच्छा प्रदर्शन इसलिए कर रही है क्योंकि उनके खुद के पास हर राज्य में कोई ना कोई प्रमुख चेहरे के रूप में प्रथम स्थान पर रहता है. कई राज्यों में भाजपा हारी भी है पर प्रदर्शन ठीक रहा है. जबकि कांग्रेस अंतर्विरोध से घिरी हुई है. जो हाईकमान फैसला लेती है वह नीचे बैठे नेता मानते नहीं दिखते हैं.

कांग्रेस ने जब जब 2014 के बाद राज्यों के अपने बड़े शहरों या नेताओं के नेतृत्व पर कमान छोड़ी है तब तक उस राज्य में अच्छा प्रदर्शन किया है. राजनीति में चेहरा एक बहुत बड़ा काम करता है फिर वह प्रांत का चुनाव हो या राज्य का.

बराक ओबामा ने अपनी किताब में लिखा राहुल गांधी कक्षा के वो छात्र हैं जो मेहनत करते हैं पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं. कुछ तो इस देश की मीडिया ने राहुल गांधी को झूठा बदनाम कर रखा है बाकी रही सही कसर राहुल गांधी के इर्दगिर्द अच्छे और सच्चे सलाहकर्ताओं की नितांत कमी पूरी कर दे रही है.

कांग्रेस को पुनः यह सोचना होगा कि क्या वह इतने के बाद भी राहुल गांधी को अध्यक्ष देखना चाहती है. अगर राहुल गांधी अध्यक्ष होंगे तो उन्हें यह देखना होगा कि वह किन चेहरों के सहारे चुनावी मैदान में उतरेंगें. राहुल गांधी को जनता के मन को टटोलना चाहिए फिर देश एवं पार्टी के हित में फैसला लेना चाहिए. भारत की राजनीति जमीन से होकर गुजरती है. जो जमीन पर आता है यानी सड़क पर रहने वाला संसद तक पहुंच जाता है. और इसी सड़क से संसद के बीच कांग्रेस को संतुलन साधने की जरूरत है.

सुयश झा युवा पत्रकार हैं और विभिन्न सोशल प्लेटफार्म्स पर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं.

(लेख के साथ सलंग्न सभी तस्वीरें गूगल से साभार हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): इस लेख में व्यक्त किए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ‘सत्य दर्शन’ उत्तरदायी नहीं है.

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